परिवार में किसी की मृत्यु के बाद मुंडन करवाने की परंपरा क्यों है? 99% लोग नहीं जानते ये 4 गहरे राज़

क्या आपने कभी सोचा है कि किसी की मृत्यु के बाद मुंडन करवाने की परंपरा क्यों होती है?

भारत में हिंदू धर्म के अनुसार, जब परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होती है, तो कई रीति-रिवाजों का पालन किया जाता है। उनमें से एक प्रमुख परंपरा सिर मुंडवाने की होती है। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी वैज्ञानिक और आध्यात्मिक वजहें भी छिपी होती हैं। आइए जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे असली कारण क्या हैं।

मृत आत्मा के प्रति सम्मान और त्याग का प्रतीक

जब परिवार में किसी की मृत्यु होती है, तो उसके प्रति प्रेम और सम्मान जताने के लिए परिजन सिर मुंडवाते हैं। यह एक तरह का त्याग माना जाता है, जिससे यह संदेश जाता है कि हम अपने प्रियजन को खोने के गम में अपनी सबसे प्रिय चीज (बाल) का त्याग कर रहे हैं। ऐसा करने से यह भी माना जाता है कि मृत आत्मा को शांति और मोक्ष मिलने में सहायता मिलती है।

स्वास्थ्य के नजरिए से भी फायदेमंद

अंतिम संस्कार के समय, मृत शरीर के आसपास कई कीटाणु और बैक्टीरिया पनप जाते हैं। ये जीवाणु परिवार के सदस्यों के संपर्क में भी आ सकते हैं। इसलिए सिर मुंडवाने के साथ-साथ स्नान करना, नाखून काटना और धूप में बैठना जरूरी माना जाता है, ताकि ये सभी बैक्टीरिया पूरी तरह से खत्म हो जाएं। यह एक तरह से स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है।

आत्मा को मोक्ष दिलाने में मदद

कहा जाता है कि आत्मा का परिजनों के साथ संपर्क बनाए रखने का सबसे आसान माध्यम बाल होते हैं। अगर किसी व्यक्ति के बाल कटे न हों, तो मृत आत्मा उनसे जुड़ी रह सकती है और उसे मोक्ष प्राप्त करने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए मुखाग्नि देने वाला व्यक्ति अपने बालों का त्याग करता है, जिससे आत्मा का मोह खत्म हो जाए और वह स्वर्ग की यात्रा कर सके।

अलग-अलग परिवारों में अलग-अलग मान्यताएँ

हर परिवार की अपनी अलग परंपराएँ होती हैं। कुछ परिवारों में केवल मृतक के बेटे या मुखाग्नि देने वाले व्यक्ति का मुंडन होता है, जबकि कुछ परिवारों में सभी पुरुष सदस्य सिर मुंडवाते हैं। हालांकि, धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टिकोण से यह परंपरा शुभ और लाभदायक मानी जाती है।

निष्कर्ष

अब आप समझ गए होंगे कि परिवार में किसी की मृत्यु के बाद सिर मुंडवाने की परंपरा क्यों निभाई जाती है। यह सिर्फ एक धार्मिक प्रथा नहीं, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक और वैज्ञानिक परंपरा भी है। अगर आपको यह जानकारी पसंद आई, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार वालों के साथ जरूर शेयर करें!

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