मुस्लिम समाज में अक्सर रिश्तेदारों के बीच शादियां देखने को मिलती हैं। यह परंपरा सिर्फ धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यावहारिक फायदों की वजह से भी निभाई जाती है। कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब करीबी रिश्तेदारों के बीच शादी होती है, तो क्या भाई-बहन जैसा रिश्ता खत्म हो जाता है? आइए, इस पर विस्तार से बात करते हैं।
मुस्लिम परिवारों में रिश्तेदारों में शादी करने की परंपरा
अपनों में शादी करने के फायदे
1. परिवारिक जुड़ाव मजबूत होता है
रिश्तेदारों में शादी करने से परिवारों के बीच संबंध और ज्यादा घनिष्ठ हो जाते हैं। इससे दोनों परिवारों में भरोसा बना रहता है और आपसी सहयोग बढ़ता है।
2. दहेज और अन्य सामाजिक समस्याओं से बचाव
अक्सर बाहरी परिवार में शादी करने से दहेज जैसी मांगें बढ़ जाती हैं, लेकिन करीबी रिश्तों में यह दबाव कम होता है।
3. शादी में सहूलियत
कई बार समाज में दिव्यांग या अन्य किसी विशेष परिस्थिति वाले लड़कों की शादी में मुश्किलें आती हैं। अपनों में शादी होने से ऐसी समस्याएं कम हो जाती हैं।
4. लड़की की सुरक्षा और सम्मान
रिश्तेदारों में शादी होने से परिवार को लड़की की सुरक्षा और देखभाल की चिंता कम रहती है, क्योंकि वह पहले से ही भरोसेमंद लोगों के बीच होती है।
क्या भाई-बहन का रिश्ता खत्म हो जाता है?
इस्लाम में दूध-रिश्तों का बहुत महत्व होता है। अगर कोई बच्चा बचपन में किसी औरत का दूध पीता है, तो वह औरत उसकी मां समान हो जाती है और उस महिला के बच्चे उसके भाई-बहन माने जाते हैं। ऐसे में उनसे शादी करना इस्लाम में वर्जित है।
लेकिन अन्य रिश्तों में यह नियम लागू नहीं होता। जैसे, मोसी की बेटी या फुफेरे-ममेरे भाई-बहन का रिश्ता खून के रिश्ते के रूप में नहीं देखा जाता, इसलिए उनके बीच शादी हो सकती है।
इस परंपरा का समाज में असर
हालांकि अपनों में शादी करने के अपने फायदे हैं, लेकिन कुछ वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, करीबी रिश्तेदारों में शादियों से जेनेटिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए कई मुस्लिम परिवार अब इस परंपरा पर पुनर्विचार कर रहे हैं और बाहरी परिवारों में भी रिश्ते जोड़ रहे हैं।
निष्कर्ष
मुस्लिम समाज में रिश्तेदारों में शादी करने की परंपरा मुख्य रूप से सामाजिक और सांस्कृतिक कारणों से प्रचलित है। यह परिवारों को जोड़ने, शादी में सहूलियत देने और रिश्तों को मजबूत करने के उद्देश्य से की जाती है। हालांकि, समय के साथ लोग इस परंपरा को लेकर नए दृष्टिकोण अपनाने लगे हैं, जिससे समाज में संतुलन बना रहे।
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