सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला! लोन की किस्त नहीं भर पाने वालों को मिली बड़ी राहत, बैंकों को दिए खास आदेश

आजकल लोन लेना आम बात हो गई है, चाहे वह किसी व्यक्तिगत जरूरत के लिए हो या बिज़नेस को बढ़ाने के लिए। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग समय पर लोन नहीं चुका पाते और बैंक उनके खाते को फ्रॉड (धोखाधड़ी) अकाउंट घोषित कर देते हैं। अब इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद बैंकों को अब बिना सुने किसी भी लोन अकाउंट को फ्रॉड घोषित करने का अधिकार नहीं होगा।

लोन धोखाधड़ी पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब बैंकों को देनी होगी सफाई का मौका!

उधारकर्ताओं को मिलेगा न्यायपूर्ण मौका

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में कहा है कि बैंक किसी भी लोन खाते को धोखाधड़ी घोषित करने से पहले उधारकर्ता (बोर्रोअर) को अपनी बात रखने का पूरा अवसर देंगे। अदालत ने यह भी कहा कि बिना सुनवाई के ऐसे फैसले उधारकर्ता के CIBIL स्कोर पर गहरा असर डाल सकते हैं, जिससे भविष्य में लोन लेने में बड़ी परेशानी आ सकती है।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने स्पष्ट किया कि कोई भी बैंक एकतरफा फैसला नहीं ले सकता। पहले उधारकर्ता को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए। यह कदम लोन डिफॉल्ट से जुड़े मामलों को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: FIR की जरूरत नहीं, पर प्रक्रिया होनी चाहिए निष्पक्ष

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक किसी लोन खाते को धोखाधड़ी घोषित करने के लिए एफआईआर दर्ज कराने के लिए बाध्य नहीं हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी लोन अकाउंट को फ्रॉड घोषित करना किसी व्यक्ति को ब्लैकलिस्ट करने जैसा है, जिसका उसके भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

यह फैसला तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर दो अलग-अलग हाई कोर्ट के फैसलों की समीक्षा की। अदालत का मानना है कि बैंकों को लोन खातों की जांच निष्पक्ष तरीके से करनी चाहिए और उधारकर्ताओं को भी अपना पक्ष रखने का पूरा मौका देना चाहिए।

आरबीआई के नियम: लोन धोखाधड़ी को लेकर क्या हैं दिशा-निर्देश?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने “फ्रॉड्स क्लासिफिकेशन एंड रिपोर्टिंग बाय कमर्शियल बैंक्स एंड सिलेक्ट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस डायरेक्शंस 2016” नाम से एक मास्टर सर्कुलर जारी किया था। इसके तहत बैंक उन लोन अकाउंट्स को धोखाधड़ी घोषित कर सकते हैं, जिनमें जानबूझकर डिफॉल्ट किया गया हो।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि बैंकों को पहले उधारकर्ताओं को सुनना होगा और फिर किसी लोन अकाउंट को फ्रॉड घोषित करने का फैसला लेना होगा।

हाई कोर्ट्स का रुख: उधारकर्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए

RBI के इस सर्कुलर को लेकर कई हाई कोर्ट्स में कानूनी चुनौतियां सामने आई थीं।

  • तेलंगाना हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने से रोकना उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी विचार को समर्थन दिया और कहा कि लोन अकाउंट्स को धोखाधड़ी घोषित करने से पहले उधारकर्ताओं को पूरी प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष: उधारकर्ताओं को मिली बड़ी राहत!

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब बैंक मनमाने ढंग से किसी भी लोन खाते को फ्रॉड घोषित नहीं कर सकते। यह फैसला उधारकर्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है और इससे बैंकों की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत होगी।

अब लोन लेने वाले लोगों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा, जिससे वे अपनी वित्तीय स्थिति को सही तरीके से प्रस्तुत कर सकेंगे। यह फैसला भारतीय बैंकिंग सिस्टम को अधिक निष्पक्ष बनाने में एक बड़ा कदम साबित होगा

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